Ibaadat Shayari – Kaun Tha Apna Jis Pe Inaayat Karte


कौन था अपना जिस पे इनायत करते
हमारी तो हसरत थी, हम भी मोहब्बत करते
उसने समझा ही नहीं मुझे किसी काबिल
वरना उसे प्यार नहीं उसकी इबादत करते