Zindagi Shayari Hindi Mein – ना जाने कैसी उल्ज़न में

ना जाने कैसी उल्ज़न में डालती गयी ये ज़िन्दगी
मंज़िलों के करीब जाते जाते सपनो को ही धुंधला करती गयी !

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