Dard Bhari Shayari – जीने के लिए रोज़ हँस लेता हुँ, मगर

जीने के लिए रोज़ हँस लेता हुँ, मगर,
रोज़ थोड़ी थोड़ी ज़िन्दगी बेच लेता हुँ…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *