Barsaat Shayari Hindi Mein – कल तक उड़ती थी जो

कल तक उड़ती थी जो मुँह तक आज पैरों से लिपट गई;
चंद बूँदे क्या बरसी बरसात की धूल की फ़ितरत ही बदल गई!

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